देहरादून : पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी

देहरादून में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, मजबूत और चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह ने जिले के भीतर व्यापक तबादला करते हुए थानों और चौकियों में नई तैनातियां सुनिश्चित की हैं।

इस व्यापक बदलाव का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करना और महत्वपूर्ण स्थानों पर अनुभवी व सक्षम अधिकारियों की तैनाती करना है। प्रशासनिक दृष्टि से यह कदम कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

एसपी कार्यालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, 50 से अधिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई थानों और चौकियों में लंबे समय से जमे अधिकारियों को हटाकर नई ऊर्जा और दृष्टिकोण के साथ तैनाती की गई है।

तबादला सूची में कुछ अधिकारियों को थाना प्रभार से हटाकर लाइन भेजा गया है, जबकि कई को जिले के महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों की कमान सौंपी गई है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इस कदम को पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

प्रमुख तबादलों की सूची इस प्रकार है (कहां से → कहां तक)

निरीक्षक स्तर

प्रदीप रावत: प्रभारी निरीक्षक राजपुर से  प्रभारी निरीक्षक सहसपुर

शंकर सिंह बिष्ट:  प्रभारी निरीक्षक सहसपुर से कैंट  प्रभारी निरीक्षक

कमल कुमार लुंठी: कैंट  प्रभारी निरीक्षक से डोईवाला

 प्रदीप राणा:  प्रभारी निरीक्षक से डोईवाला से पुलिस कार्यालय

 

उपनिरीक्षक (दरोगा) स्तर – प्रमुख तबादले

अशोक राठौर: थानाध्यक्ष वसंत विहार से एसआईएस पुलिस कार्यालय

मुकुल त्यागी: प्रभारी एसओजी से एंटी टास्क फोर्स (एटीएफ)

खुशीराम पांडे: प्रभारी एटीएफ से  देहात

शैंकी कुमार: एसओजी से थानाध्यक्ष वसंत विहार थाना

संदीप कुमार: एसओजी से प्रभारी एसओजी नगर

परमेश्वर दत्त भट्ट: थानाध्यक्ष सेलाकुई से राजपुर

लोकपाल परमार: पुलिस लाइन से थानाध्यक्ष सेलाकुई

आशीष कुमार: चौकी प्रभारी ISBT से नेहरू कॉलोनी

मनोहर सिंह रावत: पुलिस लाइन से डोईवाला

मनीष नेगी: कोतवाली नगर से सहसपुर

रविंद्र सिंह नेगी: नेहरू कॉलोनी से कैंट

जितेंद्र कुमार: सहसपुर से प्रेमनगर

राजेश बिष्ट: समाल्टा चौकी से कोतवाली नगर

जयवीर सिंह: कोतवाली नगर से पटेलनगर

अरविंद पंवार: ऋषिकेश से समाल्टा चौकी

आदित्य सेनी: रायवाला से लालतप्पड़ चौकी

विनय मित्तल: लालतप्पड़ चौकी से डालनवाला

रफत अली: पुलिस लाइन से नयागांव चौकी

वैभव गुप्ता: नयागांव से कुल्हाल चौकी

परवेन्द्र रावत: सेलाकुई से मांडवाला चौकी

ओमप्रकाश: मांडवाला से नेहरू कॉलोनी

विनय द्विवेदी: पुलिस लाइन से आईएसबीटी/नेहरू कॉलोनी

दीपक पंवार: बाईपास चौकी से एसओजी नगर

सुरज कंडारी: चकराता से जौनसार (राजपुर क्षेत्र)

दीपक द्विवेदी: जौनसार से आईटी पार्क चौकी

राकेश पुंडीर: नेहरू कॉलोनी से लक्खीबाग चौकी

गिरीश बडोनी: विकासनगर से जोगीवाला चौकी

विजय प्रताप राठी: जोगीवाला से प्रेमनगर

अजय भट्ट: विकासनगर से रायपुर

 

अन्य तबादले (सूची जारी)

शैलेन्द्र मंगाई: पुलिस लाइन से ISBT /ऋषिकेश

कुसुम पुरोहित: कोतवाली नगर से खुड्डबुड़ा/कोतवाली नगर

बलवीर सिंह: पुलिस लाइन से नालापानी/डालनवाला

अजीत कुमार: लक्ष्मण चौक से नेहरू कॉलोनी

ज्योतिप्रसाद उनियाल: खुड्डबुड़ा से लक्ष्मण चौक

कृष्ण कुमार: पुलिस लाइन से चकराता

विकेंद्र सिंह: पुलिस लाइन से डालनवाला

गिरीश नेगी: पुलिस लाइन से एसआईएस शाखा

रजनी चमोली: पुलिस लाइन से एसआईएस शाखा

शशि: पुलिस लाइन से सेलाकुई

मेधा आलोकोटी: पुलिस लाइन से कोतवाली नगर

नीमा: कोतवाली नगर से रायपुर

विनय शर्मा: पुलिस लाइन से कोतवाली नगर

अशोक कुमार: पुलिस लाइन से रायवाला

लोकपाल परमार: पुलिस लाइन से रायपुर

मनोज रावत: ऋषिकेश से डालनवाला

दीप शिखा: पुलिस लाइन से रानीपोखरी

विविता बेलवाल: क्लेमनटाउन से एसआईएस शाखा

ज्योति: कोतवाली नगर से रायवाला

दीपक गैरोला: कैंट से पंडितवाड़ी चौकी

मोहन सिंह: पंडितवाड़ी से कैंट

उत्तराखण्ड में बढ़ी गर्मी की मार, चटख धूप से चढ़ा पारा

देहरादून : उत्तराखण्ड में इन दिनों मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और अधिकांश क्षेत्रों में चटख धूप खिल रही है। हालांकि, पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं आंशिक बादल भी नजर आ रहे हैं, लेकिन इससे गर्मी में खास राहत नहीं मिल रही।

पहाड़ से लेकर मैदान तक तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे दोपहर के समय चिलचिलाती धूप लोगों को परेशान कर रही है। खासकर मैदानी क्षेत्रों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां पारा सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है। तेज धूप के कारण तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में मंगलवार सुबह से ही तेज धूप देखने को मिली। दोपहर के समय गर्मी अपने चरम पर पहुंच गई, हालांकि बीच-बीच में चल रही हवाओं ने लोगों को कुछ राहत जरूर दी।

पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है, जिससे रातें भी अपेक्षाकृत गर्म महसूस हो रही हैं। लगातार बने शुष्क मौसम के कारण दिन के समय तेज और झुलसाने वाली धूप पड़ रही है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि शुक्रवार को एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से शनिवार से प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मौसम करवट ले सकता है—आंशिक बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे तापमान में गिरावट आ सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।

वन गुज्जरों को मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद तेज, डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने दिए ठोस निर्देश

पौड़ी : जनपद में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन गुज्जर समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान कोटद्वार एवं यमकेश्वर तहसील अंतर्गत कुनाऊँ चौड़, सिगड्डी, खिल्ली, चमरिया, सुखरो आदि वन क्षेत्रों के हितधारकों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना गया तथा भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण के साथ समाधान पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में ऐसे वन क्षेत्रों की विस्तृत समीक्षा की गयी, जहां निवासरत वन गुज्जर परिवारों के पहचान पत्र, राशन कार्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज अब तक नहीं बन पाए हैं। जिलाधिकारी ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए कि ऐसे सभी गांवों एवं बस्तियों का शीघ्र चिन्हीकरण कर उन्हें नियमानुसार ग्राम पंचायतों एवं ग्राम सभाओं में सम्मिलित किया जाए, ताकि वहां निवासरत लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि कई वन गुज्जर परिवार किसी भी राजस्व अभिलेख या ग्राम पंचायत रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं, जिसके कारण वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इस पर उन्होंने उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि समिति गठित कर ग्राम स्तर पर सर्वेक्षण एवं सत्यापन की कार्यवाही सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक पात्र परिवार का पंजीकरण किया जाए।

जिलाधिकारी ने वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों के निस्तारण के लिए ग्राम स्तर पर वन अधिकार समितियों के गठन पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पात्र प्रकरणों को विधिवत संकलित कर उपजिलास्तरीय समिति को प्रेषित किया जाए, जिससे वन गुज्जर समुदाय को उनके वैधानिक अधिकार प्राप्त हो सकें।

जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि वन ग्रामों का वैज्ञानिक ढंग से मानचित्रण करते हुए उन्हें चिन्हित किया जाए और नियमानुसार राजस्व ग्रामों में सम्मिलित करने हेतु प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाए। इस संबंध में उपजिलाधिकारी, कोटद्वार को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि उनके अधीनस्थ क्षेत्रों में आने वाले सभी वन गांवों का प्राथमिकता के आधार पर चिन्हीकरण कर कार्यवाही सुनिश्चित करें।

बैठक में डीपीआरओ को निर्देशित किया गया कि 31 मई तक सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं की बैठकें आयोजित कराई जाएं तथा इनके माध्यम से सर्वे कार्य को पूर्ण किया जाए। साथ ही सर्वे के लिए तिथियां निर्धारित कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।

बैठक में यह भी सामने आया कि वन गुज्जर समुदाय के बच्चों को आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र एवं विद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर इन समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आवश्यकतानुसार राजस्व बोर्ड से संवाद स्थापित कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने की बात भी कही।

जिलाधिकारी ने कहा कि वन पंचायतों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, जिससे वन गुज्जर समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन एवं अन्य सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस कार्य को संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण किया जाए, ताकि वन गुज्जर समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित न रहना पड़े और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नाजिश कलीम ने कहा कि वन गुज्जर समुदाय को उनके वैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन कर समुदाय को उनके अधिकारों एवं कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे अपने अधिकारों का प्रभावी रूप से उपयोग कर सकें।

इस अवसर पर पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, एसडीओ वन लक्की शाह, अपर समाज कल्याण अधिकारी अनिल सेमवाल सहित वन गुज्जरों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक, अर्बन चैलेंज फंड से बदलेगा उत्तराखंड का शहरी परिदृश्य
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के शहरों को मिलेगा अर्बन चैलेंज फंड का लाभ

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों के समग्र विकास, आधुनिक आधारभूत ढांचे के निर्माण और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अर्बन चैलेंज फंड (UCF) राज्य के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रही है। राज्य सचिवालय में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें अपर सचिव आवास विनोद गिरी सहित आवास व शहरी विकास के उच्चाधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहरी विकास निदेशालय, उत्तराखंड शासन द्वारा योजना को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत राज्य के नगर निकाय प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर परियोजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेंगे।

₹1 लाख करोड़ की राष्ट्रीय योजना, उत्तराखंड को विशेष लाभ

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा संचालित इस योजना के तहत देशभर में ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। योजना का उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को आकर्षित कर उन्हें विकास के नए केंद्रों के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड के नगर निकाय इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं और समयबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करें, ताकि राज्य के शहरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके।

पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड को मिलेगा अतिरिक्त फायदा

उत्तराखंड को इस योजना में विशेष लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटे नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी। जिन निकायों की वित्तीय क्षमता सीमित है, वे भी अब विकास योजनाओं को गति दे सकेंगे।

तीन क्षेत्रों में भेजे जाएंगे विकास प्रस्ताव

योजना के अंतर्गत नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। पहला, जल एवं स्वच्छता, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट, वर्षा जल निकासी और कूड़ा निस्तारण शामिल हैं। दूसरा, रचनात्मक पुनर्विकास, जिसके तहत पुराने शहर क्षेत्रों, बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प किया जाएगा। तीसरा, सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स, जिसमें शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने वाली योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी।

राज्य के कई शहरों को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार द्वारा संभावित परियोजनाओं के उदाहरण भी तय किए गए हैं। ऋषिकेश, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, श्रीनगर, रामनगर और रुद्रपुर जैसे शहरों में औद्योगिक, तीर्थाटन पर्यटन और शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।

50 प्रतिशत मार्केट फाइनेंस अनिवार्य

योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कुल परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मार्केट फाइनेंस यानी बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी मॉडल से जुटाना होगा। केंद्र सरकार 25 प्रतिशत और शेष 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार अथवा नगर निकाय वहन करेंगे। इससे नगर निकायों में वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

प्रदर्शन आधारित होगी फंडिंग

फंड जारी करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित रखी गई है। स्वीकृति के बाद केंद्रीय सहायता तीन किस्तों में मिलेगी—पहली किस्त 30 प्रतिशत, दूसरी 50 प्रतिशत और अंतिम 20 प्रतिशत। आगे की किस्तों के लिए परियोजना की भौतिक प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।

सुधारों की शर्तें भी लागू योजना के साथ कई

सुधारात्मक शर्तें भी जोड़ी गई हैं। नगर निकायों को संपत्ति कर सुधार, ऑडिटेड वित्तीय लेखे, डिजिटल नागरिक सेवाएं, GIS आधारित सर्वे, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जलापूर्ति सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन जैसे कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री ने दिए तेजी से कार्यवाही के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी नगर निकाय शीघ्रता से अपने क्षेत्रों की प्राथमिक परियोजनाएं चिन्हित करें, Concept Note तैयार करें और DPR बनाकर समय पर केंद्र सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों को स्वच्छ, सुगम, आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उत्तराखंड के शहरी भविष्य का रोडमैप

अर्बन चैलेंज फंड उत्तराखंड के शहरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी विकास का रोडमैप साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह योजना राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया परिवर्तनकारी योजना

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड उत्तराखंड के शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योजना साबित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी नगर निकायों को इस योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय स्वरूप को देखते हुए यहां के नगर निकायों को विशेष लाभ मिलेगा, जिससे छोटे शहरों और नगर पंचायतों में भी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों से गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक परियोजनाएं तैयार कराने पर विशेष जोर दे रही है। जलापूर्ति, सीवरेज, स्वच्छता, ट्रैफिक प्रबंधन, पर्यटन सुविधाएं, पुराने शहर क्षेत्रों का पुनर्विकास और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरों को आत्मनिर्भर, आधुनिक, स्वच्छ और निवेश अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सभी नगर निकायों को समयबद्ध रूप से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

ड्रोन और कैमरों की नजर में आएंगे वनाग्नि के दोषी, रुद्रप्रयाग वन विभाग सख्त
रुद्रप्रयाग : रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। तापमान में लगातार वृद्धि के चलते वनाग्नि की संभावनाओं को देखते हुए विभाग ने अब हाई-टेक निगरानी शुरू कर दी है। ड्रोन और कैमरा ट्रैप की मदद से जंगल में आग लगाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डीएस पुंडीर ने जानकारी देते हुए बताया कि वन प्रभाग की सभी छह रेंजों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी की जा रही है। आधुनिक तकनीक के जरिए आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि बढ़ते तापमान के मद्देनजर जंगलों के आसपास आग न लगाएं और वन संपदा की सुरक्षा में सहयोग करें।



ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में पहाड़ी स्वाद का संगम, यात्रियों को मिल रहा खास अनुभव, सीएम धामी की पहल, डीएम सविन बंसल की निगरानी, यात्रियों के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं
  • महिला समूहों के हाथों से परोसे जा रहे पारंपरिक व्यंजन, श्रद्धालु हो रहे आकर्षित

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत ऋषिकेश नगर निगम द्वारा ट्रांजिट कैंप में यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन एवं निगरानी में संचालित इन व्यवस्थाओं के तहत स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन परोसे जा रहे हैं, जो चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित कर रहे हैं।

ट्रांजिट कैंप में उड़द की दाल के पकोड़े, कापली भात, तिल की चटनी, जंगोरे की खीर और मंडवे की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर यात्री न केवल उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति से रूबरू हो रहे हैं, बल्कि उन्हें यात्रा के दौरान पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध हो रहा है। इन व्यंजनों का स्वाद चखने के बाद श्रद्धालु उत्साह के साथ अपनी आगे की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं।

उपासना जन सेवा स्वायत्त सहकारिता संगठन से जुड़ी 12 समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे इन व्यंजनों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। महिला समूहों की यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। बिहार से आए यात्री अरुण कुमार ने बताया कि इन पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से उन्हें उत्तराखंड की संस्कृति और स्वाद का अनूठा अनुभव मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं।

वहीं, गणपति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुनीता बंसल ने कहा कि नगर निगम द्वारा ट्रांजिट कैंप में स्टॉल लगाने का अवसर मिलने से महिलाओं को अपनी आजीविका मजबूत करने का मंच मिला है। उन्होंने धामी सरकार और जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल जहां एक ओर यात्रियों को सुविधाएं प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। ट्रांजिट कैंप में विश्राम के दौरान श्रद्धालु स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेते हुए अपनी यात्रा को और भी यादगार बना रहे हैं।





उद्धव-कुबेर जी की पावन डोलियाँ पहुँचीं बद्रीनाथ धाम, कपाट खुलने की तैयारियाँ तेज

बद्रीनाथ : शीतकालीन प्रवास के उपरांत आज भगवान बद्री विशाल के प्रतिनिधि स्वरूप उद्धव जी एवं देवताओं के खजांची कुबेर जी की पवित्र उत्सव डोलियाँ योगध्यान बद्री मंदिर, पांडुकेश्वर से सकुशल श्री बद्रीनाथ धाम पहुँच गईं। इस दिव्य आगमन के साथ ही धाम में कपाट खुलने की तैयारियों को और गति मिल गई है तथा सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो उठा।

आज प्रातःकाल योगध्यान बद्री मंदिर, पांडुकेश्वर में पारंपरिक पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात इस पावन यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा में भगवान बद्री विशाल की उत्सव डोली, आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी, पवित्र गाडू घड़ा (तिल तेल कलश), रावल जी (मुख्य पुजारी) सहित भगवान के सखा उद्धव जी एवं खजांची कुबेर जी की डोलियाँ भव्यता के साथ बद्रीनाथ धाम की ओर रवाना हुईं।

पूरे यात्रा मार्ग में अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। भारतीय सेना के बैंड की मधुर एवं भक्तिपूर्ण धुनों, “जय बद्री विशाल” के गगनभेदी जयकारों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच यह पवित्र काफिला आगे बढ़ता रहा। मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख पड़ावों—विष्णुप्रयाग, लामबगड़ एवं हनुमानचट्टी—पर स्थानीय लोगों एवं श्रद्धालुओं द्वारा डोलियों का पारंपरिक स्वागत किया गया तथा पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस द्वारा पूरे मार्ग पर चाक-चौबंद प्रबंध किए गए थे, जिससे यह संपूर्ण यात्रा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब शीतकाल में श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान विष्णु के प्रतिनिधि उद्धव जी एवं कुबेर जी योगध्यान बद्री, पांडुकेश्वर में विराजमान रहते हैं। चारधाम यात्रा के पुनः आरंभ से पूर्व इन दिव्य स्वरूपों का बद्रीनाथ धाम लौटना एक अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है, जो यह दर्शाता है कि भगवान की दिव्य सत्ता और व्यवस्था निरंतर बनी रहती है।

उद्धव जी एवं कुबेर जी की इस पावन वापसी के साथ ही अब श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, जिसका देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

अनोखी शादी : एक परिवार में छह शादियां, दुल्हन लेकर जाएगी बारात, गहने और शराब को लेकर भी बड़ा फैसला

जौनसार : उत्तराखंड का जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और विशिष्ट परंपराओं के लिए दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां की ‘जोजड़े’ परंपरा आज भी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। इस परंपरा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर नहीं जाता, बल्कि दुल्हन स्वयं बारात लेकर दूल्हे के घर पहुँचती है।

नारी सम्मान और अद्वितीय लोक संस्कृति का यह अद्भुत उदाहरण आगामी 29 अप्रैल को चकराता ब्लॉक के खारसी गाँव में देखने को मिलेगा, जहाँ एक ही परिवार में पहली बार छह शादियां एक साथ संपन्न होने जा रही हैं। खारसी गांव निवासी दौलत सिंह चौहान के परिवार में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में उनके पांच पुत्रों नरेंद्र, प्रीतम, राहुल, अमित और प्रदीप के साथ उनकी एकमात्र पुत्री राधिका का विवाह भी एक साथ होगा।

आज के दौर में जहां एकल परिवारों का चलन बढ़ रहा है, वहीं एक ही छत के नीचे रहने वाला यह संयुक्त परिवार अपनी एकता और आपसी तालमेल से समाज के सामने एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है। परिजनों के साथ-साथ पूरे क्षेत्रवासियों में इस सामूहिक विवाह को लेकर भारी उत्साह है, क्योंकि यह आयोजन न केवल पारिवारिक मिलन का उत्सव है, बल्कि क्षेत्रीय गौरव का भी प्रतीक है।

इस समारोह की एक और महत्वपूर्ण बात सादगी और सामाजिक सुधार पर जोर देना है। बीते वर्ष गांव के स्याणा शूरवीर सिंह पंवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में फिजूलखर्ची रोकने और सामाजिक कार्यक्रमों में सादगी अपनाने का निर्णय लिया गया था। इसी के तहत इस विवाह में महिलाओं के आभूषण पहनने की सीमा तय की गई है और कान की झुमकी, नाक की फूली व मंगलसूत्र जैसे पारंपरिक गहनों तक ही इसे सीमित रखा गया है।

साथ ही, समारोह में अंग्रेजी शराब और बियर पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सामूहिक विवाह से जहाँ खर्च में कमी आती है, वहीं यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़े रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

यात्रा और पर्यटन सीजन के दृष्टिगत नीलकंठ मार्ग और देवप्रयाग संगम पर सुरक्षा का संयुक्त निरीक्षण

पौड़ी : चारधाम यात्रा सीजन और आगामी काँवड यात्रा के दृष्टिगत श्रद्धालुओं एवं यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस टीम, वन विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा नीलकंठ पैदल मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, संवेदनशील स्थलों की निगरानी, मार्ग संकेतकों की उपलब्धता, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता व्यवस्था तथा आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव संसाधनों की उपलब्धता का जायजा लिया गया। साथ ही आवश्यक सुधारात्मक व्यवस्थाओं को समय रहते पूर्ण करने हेतु संबंधित विभागों के साथ आपसी समन्वय स्थापित किया गया।

साथ ही चार धाम यात्रा के मुख्य पड़ाव देवप्रयाग संगम क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था एवं यातायात संचालन को सुचारु बनाए रखने हेतु पुलिस टीम द्वारा नगर पालिका देवप्रयाग के अधिकारियों के साथ संपूर्ण संगम क्षेत्र का संयुक्त भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान संगम घाट, मुख्य मार्गों, पार्किंग स्थलों, पैदल मार्गों तथा भीड़भाड़ वाले संवेदनशील क्षेत्रों का गहन निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। साथ ही पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने, अनावश्यक जाम की स्थिति से बचाव, श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने, बैरिकेडिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों से त्वरित निपटने हेतु आपसी समन्वय स्थापित किया गया। यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं।

केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले, भक्ति से गूंजा पूरा हिमालय

केदारनाथ : केदारनाथ मंदिर के कपाट आज विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। हिमालय की गोद में बसे इस विश्व प्रसिद्ध धाम में कपाट खुलने के अवसर पर भव्य सजावट की गई। मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर दिव्य आभा से जगमगा उठा।

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। उन्होंने मंदिर में पहली पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। कपाट खुलने के मौके पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे, जिनमें भारी उत्साह देखने को मिला। “हर हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

 

11वां ज्योतिर्लिंग है केदारनाथ

केदारनाथ धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। हिंदू मान्यता के अनुसार, यहां भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। यह धाम उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध चार धामों में से एक होने के साथ-साथ पंच केदार में प्रथम केदार के रूप में भी पूजा जाता है।

हर वर्ष ग्रीष्मकाल के छह महीनों तक मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं, जबकि शीतकाल में भारी बर्फबारी के चलते कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भगवान केदारनाथ की पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विधिवत संपन्न होती है।

कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ यात्रा की भी विधिवत शुरुआत हो गई है, और आने वाले दिनों में यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।