देहरादून के विकास का नया ब्लूप्रिंट, 968 करोड़ के बजट संग शहर को मिलेगा आधुनिक स्वरूप, एमडीडीए की 113वीं बोर्ड बैठक में जनहित, हरियाली और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

देहरादून : देहरादून शहर के सुनियोजित विकास, पर्यावरण संतुलन और आधुनिक सुविधाओं को नई रफ्तार देने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की 113वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। आयुक्त गढ़वाल मंडल एवं प्राधिकरण अध्यक्ष विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 968 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही आम जनता से जुड़े आवासीय, व्यावसायिक और पर्यटन संबंधी प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे शहर के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बैठक की शुरुआत उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी द्वारा अध्यक्ष और सदस्यों के स्वागत से हुई। इसके बाद पिछली 112वीं बोर्ड बैठक की अनुपालन आख्या प्रस्तुत की गई, जिसे बोर्ड ने अवलोकन के बाद पुष्टि करते हुए आगे की कार्यवाही के लिए अनुमति प्रदान की। इस दौरान कुल 48 प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के बाद नियमानुसार स्वीकृति दी गई।

विकास को मिलेगी रफ्तार

बैठक में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 968 करोड़ रुपये का बजट शहर के व्यापक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। इस बजट के माध्यम से न केवल शहरी ढांचे को मजबूत किया जाएगा, बल्कि देहरादून को एक स्मार्ट और पर्यावरण अनुकूल शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम होगा।

जनहित के प्रस्तावों को हरी झंडी

बोर्ड बैठक में आम जनमानस से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें ईको-रिजॉर्ट, होटल, व्यावसायिक निर्माण और आवासीय मानचित्र से जुड़े मामलों को स्वीकृति दी गई है। इन फैसलों से पर्यटन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने के साथ-साथ शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा। इसके अलावा, भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2011 (संशोधित) को राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुरूप अंगीकृत किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और सुव्यवस्था सुनिश्चित होगी।

हरित देहरादून की दिशा और बढ़ते तापमान के न्यूनीकरण के लिए बड़ा कदम

शहर में लगातार बढ़ते तापमान के न्यूनीकरण और पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना अब प्राथमिकता बन गया है। इसी दिशा में प्राधिकरण ने वृक्षारोपण, जल संरक्षण और नए पार्कों के निर्माण जैसे कार्यों को युद्धस्तर पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने, जल स्रोतों को संरक्षित करने और सार्वजनिक स्थलों को विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल तापमान में कमी लाना है, बल्कि शहर की प्राकृतिक सुंदरता को सहेजते हुए आम जनमानस को स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना भी है।

हरियाली और सौंदर्यीकरण पर विशेष जोर

शहर को सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। डिवाइडरों पर पौधारोपण, गमलों की व्यवस्था, खाद-मिट्टी और पानी की आपूर्ति के लिए विशेष उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी गई। इसके तहत एक ट्रैक्टर, EICHER 333 (प्रेशर पंप सहित) और हाइड्रोलिक ट्रॉली खरीदने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पार्कों के निर्माण जैसे कार्यों को युद्धस्तर पर करने के निर्देश दिए गए। यह पहल शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के साथ ही नागरिकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने में मददगार होगी।

शहर के भविष्य की मजबूत नींव

113वीं बोर्ड बैठक के फैसले देहरादून के भविष्य की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। जहां एक ओर बजट और विकास योजनाएं शहर को आधुनिक बनाएंगी, वहीं हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर जोर इसे रहने योग्य और संतुलित शहर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने शहर के समग्र विकास के लिए अपने सुझाव भी दिए। अंत में अध्यक्ष द्वारा सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक समाप्ति की घोषणा की गई। स्पष्ट है कि एमडीडीए की यह बैठक केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि देहरादून के विकास की नई पटकथा लिखने की दिशा में एक ठोस कदम है।

आयुक्त विनय शंकर पांडेय का बयान

आयुक्त गढ़वाल मंडल एवं प्राधिकरण अध्यक्ष विनय शंकर पांडेय ने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देहरादून को एक संतुलित, हरित और व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि बजट और स्वीकृत योजनाओं के माध्यम से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए लगातार जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने बताया कि बोर्ड बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों से न केवल शहर का भौतिक विकास होगा, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का फोकस संतुलित विकास पर है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का समावेश हो। तिवारी ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में देहरादून एक आदर्श शहर के रूप में स्थापित होगा।

सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान

प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि बैठक में कुल 48 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें अधिकांश जनहित और विकास से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि सभी प्रस्तावों को नियमानुसार स्वीकृति दी गई है और अब इनके क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भवन निर्माण उपविधियों में संशोधन से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता आएगी और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से सीएम धामी ने दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई घंटे में तय किया, बोले, ये नए भारत की तेज रफ्तार है

देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज करीब ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम समय है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है। अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

डीएम नितिका खण्डेलवाल का टिहरी में सड़क हादसों पर सख्त एक्शन, संवेदनशील मार्गों पर भूस्खलन उपचार के निर्देश

टिहरी : जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने चंबा, कुंजापुरी और देवप्रयाग क्षेत्रों में हाल ही में हुए हादसों की जानकारी लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने चंबा–उत्तरकाशी सड़क के सभी संवेदनशील स्थलों पर भूस्खलन उपचार कार्य करने, जेसीबी मशीनों की तैनाती सुनिश्चित करने तथा उनकी सूची संबंधित विभागों के साथ साझा करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग, चंबा के अधिशासी अभियंता जगदीश खाती ने जानकारी दी कि चंबा–नैल मार्ग पर 15 पैरापेट लगे है तथा आगे क्रैश बैरियर लगाने की कार्यवाही प्रस्तावित है।

एआरटीओ सतेंद्र राज ने राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, एवं अन्य जिला मार्गों पर हुई दुर्घटनाओं, घायलों एवं मृतकों के आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने जनपद में चेक पोस्ट, एएनपीआर (ANPR) प्रणाली की स्थिति से भी अवगत कराया। साथ ही ढलान वाले मार्गों पर रंबल स्ट्रिप्स बनाने, यात्रियों को वाहन के ब्रेक, टायर, क्लच, हैंडब्रेक आदि की जांच करने हेतु जागरूक करने पर जोर दिया। परिवहन विभाग द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाई एवं दुर्घटनाओं से संबंधित अभियोगों की जानकारी भी साझा की गई।

एसएसपी श्वेता चौबे ने हाल ही में नैल–चंबा मार्ग पर हुए हादसे के स्थल को ब्लैक स्पॉट घोषित कर उसका अध्ययन करने का सुझाव दिया। उन्होंने चारधाम यात्रा सीजन के दौरान रात्रि में यात्रा से बचने तथा प्रातः 4 बजे के बाद ही यात्रा प्रारंभ करने के पूर्व जारी सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने पर बल दिया।

ऑल उत्तराखंड मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन द्वारा तछला जैसे ढलान वाले मार्गों पर स्पीड साइन बोर्ड लगाने, दुर्घटनाओं की विस्तृत जांच, वाहनों की फिटनेस जांच, ड्राइविंग लाइसेंस (विशेषकर हिल लाइसेंस) की जांच तथा पार्किंग की समस्या के समाधान का सुझाव दिया गया। इस पर जिलाधिकारी ने डंपिंग जोन को समतल कर पार्किंग हेतु उपयोग में लाने के निर्देश दिए।

इस बैठक में एडीएम शैलेंद्र नेगी, एएसपी दीपक, सभी एसडीएम, एआरटीओ सतेंद्र राज, बीआरओ से एस एस रावत, आंल उतराखंड मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ऋषिकेश से गजेंद्र सिंह नेगी (प्रदेश अध्यक्ष), सुरेश तिवारी (प्रदेश महासचिव), अमर सिंह रावत (प्रदेश सचिव), बिजेंद्र सिंह कडांरी (प्रदेश संघठन मंत्री) आदि संबंधित उपस्थित रहे ।

महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर न हो किसी भी प्रकार की राजनीति – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
  • मुख्यमंत्री धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र – ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।

तीन तलाक से दिलाई मुक्ति

वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड को मिलता फायदा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।

प्रदेश में मजबूत हो रही मातृशक्ति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।

इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

डीएम गौरव कुमार ने ली जिलास्तरीय पुनरीक्षण समिति की समीक्षा बैठक, डीएलआरसी बैठक में ऋण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के निर्देश
चमोली : जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला सभागार में जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति (डीएलआरसी) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न ऋण योजनाओं, कम ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) वाले बैंकों की स्थिति, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, वित्तीय समावेशन तथा आरसी से संबंधित मामलों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सरकार प्रायोजित ऋण योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही सभी समस्याओं का निस्तारण एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उद्योग विभाग द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत ऋण आवेदनों के निरस्तीकरण का कारण स्पष्ट न किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की।
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत ग्रामीणों की आय बढ़ाने हेतु वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। कृषि विभाग को केसीसी कार्ड वितरण में तेजी लाने, लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा गया।
बैठक में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (एमएसवाई), पीएमईजीपी, एनआरएलएम, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, होम-स्टे योजना, पीएम-स्वनिधि, पीएम अजय तथा एससीपी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को सीडी रेशियो में सुधार लाने तथा विभागीय अधिकारियों को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।बैठक में एलडीएम डीएस गर्ब्याल ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बैंकों द्वारा स्वीकृत ऋण, प्रगति एवं सीडी रेश्यो की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, डीडीओ केके पंत, नाबार्ड के एजीएम श्रेयांश जोशी, आरबीआई एलडीओ रजनीश सैनी, पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़, एनआरएलएम के संजय कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।







गंगा की निर्मल धारा को प्रशासन सख्त, बोले सीडीओ लापरवाही बर्दाश्त नहीं

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने गंगा संरक्षण समिति की बैठक में गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता बनाए रखने पर बल दिया। कहा कि किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीडीओ ने नगर पालिका, पंचायतों और जिला पंचायत के अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदियों के संरक्षण के लिए तय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के सुचारु संचालन और नियमित रखरखाव पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उपचारित जल एनजीटी के मानकों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि गंदा पानी नदियों में न जाए। उन्होंने डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने और कूड़ा फैलाने वाले व्यावसायिक संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को मासिक कलेक्शन एवं प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर समय-समय पर प्लांट के सैंपल की जांच सुनिश्चित की जाए।

जिला परियोजना अधिकारी नमामि गंगे गोविंद बुटोला ने बताया कि समिति की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं और अब तक 77 बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि इस साल की यह पहली बैठक है। इस दौरान डीएफओ सर्वेश कुमार दुबे समेत संबंधित विभागों के अधिकारी और नगर निकायों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

माँ बगलामुखी जयंती : भक्ति, विजय और सामाजिक एकता का संगम; माजरी माफी से बनखंडी तक गूंजा जयकारा, भंडारे में उमड़ा आस्था का सैलाब
  • माँ पीताम्बरा बगलामुखी की छांव में शक्ति का उत्सव

देहरादून। उत्तराखंड की धरती पर 24 अप्रैल 2026 को आस्था, ऊर्जा और एकता का दुर्लभ संगम देखने को मिला। माँ बगलामुखी जयंती के अवसर पर देहरादून के माजरी माफी, मोहकमपुर स्थित माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ में आयोजित समारोह ने भक्ति को उत्सव में और उत्सव को जन-आस्था के महाकुंभ में बदल दिया। मंदिर परिसर श्रद्धा से सराबोर था, जहां हजारों भक्तों ने माँ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और सामूहिक भंडारे में शामिल होकर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की।

देहरादून के मोहकमपुर (मजारी माफी) में स्थित माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ एक पवित्र धार्मिक स्थल है, जो माता बगलामुखी (दस महाविद्याओं में से आठवीं) को समर्पित है। यह मंदिर शत्रुओं पर विजय, कानूनी मामलों में सफलता और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ माता बगलामुखी को पीला रंग, वस्त्र और भोग प्रिय हैं, इसलिए इसे ‘पीताम्बरा पीठ’ कहा जाता है।

भक्ति की रोशनी में नहाया शक्तिपीठ
सुबह से ही माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना और हवन से आयोजन का शुभारंभ हुआ। फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजा मंदिर दूर से ही आकर्षण का केंद्र बना रहा। “जय माँ बगलामुखी” के जयकारों से गूंजता परिसर एक अलौकिक ऊर्जा का अहसास करा रहा था। भंडारे में हर वर्ग के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती रही। मंदिर समिति और स्थानीय समाजसेवकों की सधी हुई व्यवस्था ने इसे अनुशासन और सेवा का आदर्श उदाहरण बना दिया।

आस्था देती है आत्मबल : आचार्य राकेश नौटियाल
माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ के संचालक व उपासक प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश नौटियाल ने कहा कि माँ बगलामुखी की उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मबल और मानसिक स्थिरता का स्रोत है। उनके शब्दों में “माँ बगलामुखी शत्रु-विनाश की ही नहीं, बल्कि संयम, साहस और विजय की अधिष्ठात्री हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति हर संकट में अडिग रह सकता है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह आयोजन साल-दर-साल लोगों को जोड़ने और समाज में सकारात्मक ऊर्जा भरने का माध्यम बन रहा है।

शक्ति, विजय और तेज का प्रतीक
माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ के संचालक व उपासक ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश नौटियाल ने कहा दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी को “पीताम्बरा देवी” कहा जाता है। पीला रंग, ऊर्जा, समृद्धि और विजय का प्रतीक उनकी उपासना का केंद्र है। मान्यता है कि उनकी कृपा से वाणी पर नियंत्रण, निर्णय क्षमता में मजबूती और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। तंत्र साधना में उनका विशेष स्थान है, जहां उनकी आराधना को बाधाओं के निवारण और आत्मिक उन्नति का प्रभावी माध्यम माना जाता है।

बनखंडी से जुड़ी आस्था की प्राचीन धारा
उत्तराखंड के बनखंडी गांव स्थित माँ बगलामुखी मंदिर इस परंपरा का प्राचीन केंद्र माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इसकी स्थापना की थी। अर्जुन और भीम द्वारा यहां साधना कर शक्ति प्राप्त करने की कथाएं आज भी जनविश्वास में जीवित हैं।
धार्मिक संदर्भ बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और परशुराम जैसे देव-पुरुषों ने भी माँ की आराधना कर विजय प्राप्त की यही कारण है कि उन्हें ‘शत्रु नाशिनी’ के रूप में भी पूजा जाता है।

संकट से समाधान तक का विश्वास
माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ के संचालक व उपासक प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश नौटियाल ने कहा वैशाख शुक्ल अष्टमी को मनाई जाने वाली माँ बगलामुखी जयंती को विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन की पूजा को शत्रु बाधा, न्यायिक विवाद और मानसिक तनाव से मुक्ति का माध्यम माना जाता है। देशभर के शक्तिपीठों में इस दिन हवन और विशेष अनुष्ठान होते हैं, माजरी माफी इसका जीवंत उदाहरण बना।

पूजा में पीत वर्ण का प्रभाव
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश नौटियाल ने कहा माँ की आराधना में पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले वस्त्र, हल्दी, चने की दाल और पीले फूल—ये सभी पूजा के अभिन्न अंग हैं। हवन में पीली सरसों और घी का प्रयोग किया जाता है। यह परंपरा केवल प्रतीक नहीं, बल्कि ऊर्जा और सकारात्मकता का सांस्कृतिक विज्ञान भी है।

आस्था के सरल उपाय, जीवन के बड़े समाधान
जयंती के दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय बड़े परिणाम देने वाले माने जाते हैं, पीली सरसों से हवन, बगलामुखी कवच का पाठ, और विशेष आहुतियां- ये सब शत्रु शमन, न्यायिक सफलता और स्वास्थ्य लाभ से जोड़े जाते हैं। पारिवारिक शांति, व्यापारिक उन्नति और मानसिक संतुलन के लिए भी इस दिन किए गए उपायों पर लोगों का गहरा विश्वास है।

जब भक्ति बनती है सामाजिक शक्ति
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश नौटियाल ने कहा पीताम्बरा बगलामुखी शक्तिपीठ में यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, सामाजिक चेतना का भी उत्सव बन गया। भंडारे में साथ बैठकर भोजन करना, हर वर्ग की भागीदारी और सेवा की भावना- ये सब मिलकर एक ऐसे समाज की तस्वीर पेश करते हैं, जहां आस्था जोड़ती है, बांटती नहीं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय उपस्थिति ने यह साबित किया कि ऐसे आयोजन पीढ़ियों को जोड़ने की ताकत रखते हैं।

आस्था से आत्मबल तक की यात्रा
आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धी दौर में माँ बगलामुखी जयंती जैसे पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मबल का आधार हैं। यह पर्व सिखाता है कि सच्ची शक्ति भीतर से आती है—और आस्था उसे जगाने का माध्यम है।

भक्ति का उत्सव, एकता का संदेश
माँ बगलामुखी जयंती ने यह सिद्ध कर दिया कि जब भक्ति और समाज एक साथ चलते हैं, तो ऊर्जा केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहती, वह पूरे समाज को रोशन करती है। माजरी माफी का माँ पीताम्बरा बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ इस दिन आस्था, सेवा और समर्पण का जीवंत केंद्र बन गया—जहां हर चेहरे पर विश्वास था और हर मन में एक ही कामना- माँ की कृपा से जीवन में शांति, शक्ति और विजय बनी रहे।

विश्व शांति का संदेश लेकर वर्ल्ड टूर पर निकली नेपाल की यमुना

बद्रीनाथ : नेपाल के झापा जिले की रहने वाली यमुना डकाल इन दिनों विश्व भ्रमण के संकल्प के साथ मानवता और शांति की राह पर हैं। बुद्ध की पावन जन्मस्थली लुंबिनी से अपनी यात्रा का श्रीगणेश करने वाली यमुना ने पहले चरण में गोरखपुर, अयोध्या, वृंदावन, मथुरा, दिल्ली, पंजाब, अमृतसर और हरियाणा की यात्रा पूरी कर बद्रीनाथ धाम में दर्शन किए। अब वह बाबा केदार के दर्शनों के लिए केदारनाथ धाम की ओर प्रस्थान कर रही हैं। यमुना की इस साहसिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति का संदेश फैलाना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना, नगरों की स्वच्छता और नारी सशक्तिकरण को नई मजबूती प्रदान करना है।

यमुना डकाल का कहना है कि उन्होंने भगवान बुद्ध की भूमि से अपनी यात्रा इसलिए शुरू की क्योंकि बुद्ध ने ही पूरी दुनिया को शांति का मार्ग दिखाया था। हालांकि, ईरान-इराक के बीच चल रहे युद्ध के कारण वीजा मिलने में आ रही तकनीकी दिक्कतों की वजह से उनके वर्ल्ड टूर की गति फिलहाल कुछ धीमी हुई है। उन्होंने बताया कि केदारनाथ दर्शन के बाद वह कुछ समय के लिए वापस नेपाल लौटेंगी और स्थितियां सामान्य होते ही दोबारा अपने विश्व भ्रमण के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करेंगी। यात्रा के दौरान जगह-जगह स्थानीय लोग यमुना का भव्य स्वागत कर रहे हैं और पर्यावरण व शांति के प्रति उनके इस जज्बे की सराहना कर रहे हैं। इससे पूर्व भी कई यात्री पर्यावरण के लिए लंबी यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन नेपाल की बेटी यमुना का यह प्रयास नारी शक्ति और वैश्विक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

हरिद्वार में गाली-गलौच से शुरू हुआ विवाद बना जानलेवा, युवक की मौत, आरोपी गिरफ्तार

हरिद्वार। शहर कोतवाली क्षेत्र के निर्मला छावनी में मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें एक युवक की जान चली गई। घटना हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित निर्मला छावनी कॉलोनी की है, जहां दो पड़ोसियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला खूनी संघर्ष में बदल गया।

पुलिस के अनुसार, दीपक सक्सेना और सौरभ कौरी के मकान पास-पास हैं। किसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो जल्द ही गाली-गलौच में बदल गई। आरोप है कि विवाद के दौरान सौरभ कौरी ने गुस्से में आकर ईंट उठाकर दीपक सक्सेना के सिर पर वार कर दिया। हमले में दीपक गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।

घायल अवस्था में परिजनों द्वारा दीपक को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए एम्स रेफर कर दिया। इलाज के दौरान दीपक की मौत हो गई।

घटना के बाद मृतक के भाई नीरज सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए चंद घंटों के भीतर आरोपी सौरभ कौरी को हिल बाईपास के जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। सीओ सिटी शिशुपाल नेगी ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा मौसम का मिजाज, उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत के संकेत

नई दिल्ली/देहरादून : पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे उत्तर भारत के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार, सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में बारिश, धूल भरी आंधी और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है।

राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मंगलवार से अगले तीन दिनों तक बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। हालांकि, तापमान अभी भी 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है, लेकिन लू के असर में कमी आएगी।

इन राज्यों में असर

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में फिलहाल भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। यूपी में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि राजस्थान में 45-46 डिग्री तक गर्मी बनी हुई है। उत्तराखंड में भी तापमान सामान्य से अधिक 39 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।

मौसम बदलने की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ जो उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा है। दूसरा, मध्य पाकिस्तान और राजस्थान के ऊपर बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन, जो मौसम में अस्थिरता पैदा कर रहा है।

सावधानी बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। धूल भरी आंधी के दौरान विजिबिलिटी कम हो सकती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को पुराने पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर होर्डिंग्स से दूर रहने की हिदायत दी गई है। सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को मास्क का उपयोग करने की सलाह दी गई है।